समुच्चयबोधक अव्यय | Conjunction
परिभाषा - जो अव्यय पदों,पदबंधों और दो वाक्यों को जोड़ते हैं ,उन्हें समुच्चयबोधक अवव्यय कहते हैं। जैसे - गोपाल और राजन सच्चे मित्र हैं
समुच्चयबोधक अवव्यय के दो भेद हैं -
1 समानाधिकरण समुच्चयबोधक अवव्यय2 व्यधिकरण समुच्चयबोधक अवव्यय
1 समानाधिकरण समुच्चयबोधक अवव्यय - जो अव्यय दो या दो अधिक समान पदों , पदबंधों , उपवाक्यों को जोड़ता है ,उसे समानाधिकरण समुच्चयबोधक अवव्यय कहते हैं। जैसे-
(क) शाम को मैं दाल ,रोटी और सब्जी खाता हूँ तथा थोड़ी देर बाद एक गिलास दूध पीता हूँ।
(ख) यह काम न टीम कर सकते हो , न ही तुम्हारा दोस्त।
(ग) मैंने पूरी कोशिश की लेकिन सब बेकार हो गयी।
इन वाक्यों में 'और' , 'तथा', 'न', 'लेकिन' आदि शब्द दो समान पदों या उपवाक्यों को जोड़ते हैं। ऐसे शब्द समानाधिकरण समुच्चयबोधक अवव्यय कहलाते हैं।
2 व्यधिकरण समुच्चयबोधक अवव्यय- जो अव्यय किसी वाक्य के एक या अघिक आश्रित उपवाक्यों को जोड़ते हैं ,उन्हें व्यधिकरण समुच्चयबोधक अवव्यय कहते हैं। जैसे -
(क) मोहन विद्यालय से घर चला गया , क्योकि उसकी तबियत ख़राब हो गयी थी।
(ख) पिता जी ने कहा कि चाचा जी को तुरंत बुला लाओ।
(ग) मैं घर जा रहा हूँ ताकि आराम कर सकूँ।
इन वाक्यों में 'क्योकि', 'कि', 'ताकि', शब्द दो ऐसे उपवाक्यों को जोड़ रहे हैं ,जिनमें एक प्रधान अथवा मुख्य उपवाक्य है और दूसरा उस पर आश्रित उपवाक्य है। इसलिए उन्हें व्यधिकरण समुच्चयबोधक अवव्यय कहा जाता है।
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