धर्मवीर भारती
प्रमुख रचनाएँ : कनुप्रिया, सात-गीत वर्ष, ठंडा लोहा (कविता संग्रह); सूरज का सातवाँ घोड़ा, गुनाहों का देवता(उपन्यास); अँधा युग (गीतिनाट्य), कहनी-अनकहनी, मानव मूल्य और साहित्य, ठेले पर हिमालय (निबंध-संग्रह)
प्रमुख सम्मान : पदमश्री, व्यास सम्मान एवं साहित्य के कई अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार
निधन : सन् 1997
गुनाहों का देवता उपन्यास से लोकप्रिय धर्मवीर भारती का आज़ादी के बाद के साहित्यकारों में विशिष्ट स्थान है। उनकी कविताएँ, कहानियाँ, उपन्यास, निबंध, गीतिनाट्य और रिपोतार्ज हिंदी साहित्य की उपलब्धियाँ हैं। भारती जी के लेखन की एक खासियत यह भी है की हर उम्र और हर वर्ग के पाठकों के बीच उनकी अलग-अलग रचनाएँ लोकप्रिय है। वे मूल रूप से व्यक्ति स्वातंत्र्य, मानवीय संकट एवं रोमानी चेतना के रचनाकार हैं। तमाम सामाजिकता एवं उत्तरदायित्वों के बावजूद उनकी रचनाओं में व्यक्ति की स्वतंत्रता ही सर्वोपरि है। रुमानियत उनकी रचनाओं में संगीत में ले की तरह मौजूद है। उनका सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यास गुनाहों का देवता एक सरस और भावप्रवण प्रेम कथा है। दूसरे लोकप्रिय उपन्यास सूरज का सातवाँ घोड़ा पर हिंदी फ़िल्म भी बन चुकी है। इस उपन्यास में प्रेम को केंद्र में रखकर निम्न मध्यवर्ग की हताशा, आर्थिक संघर्ष, नैतिक विचलन और अनाचार को चित्रित किया गया है। स्वतंत्रता के बाद गिरते हुए जीवन मूल्य, अनास्था, मोहभंग, विश्वयुद्धों से उपजा हुआ डर और अमानवीयता की अभिव्यक्ति अंधा युग में हुई है। अंधा युग गीतिसाहित्य के श्रेष्ठ गीतिनाट्यों में है। मानव मूल्य और साहित्य पुस्तक समाज-सापेक्षिता को साहित्य के अनिवार्य मूल्य के रूप में विवेचित करती है।
इन विधाओं के अलावा भारती जी ने निबंध और रिपोतार्ज भी लिखे। उनके गद्य लेखन में सहजता और आत्मीयता है। बड़ी-से-बड़ी बात वो बातचीत की शैली में कहते हैं और सीधे पाठकों के मन को छू लेते हैं। एक लम्बे समय तक हिंदी की साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग (फ़िलहाल प्रकाशन बंद है ) के संपादक रहते हुए हिंदी पत्रकारिता को सजा-सवाँरकर गंभीर पत्रकारिता का एक मानक बनाया।

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