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लोकोक्तियाँ | Proverb

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लोकोक्तियाँ
लोकोक्तियाँ  

'लोकोक्ति' को 'कहावत' भी कहते हैं। वास्तव में कहावतों के मूल में कोई कहानी या घटना होती है। बाद में जब लोगो की जबान पर उस घटना या कहानी से निकली बात चल पड़ती है तो वही 'लोकोक्ति या कहावत' बन जाती है। 
लोकोक्ति एक पुरे वाक्य के रूप में होती है। इसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है। स्वतंत्र अर्थ रखने के कारण किसी कथन की पुष्टि के लिए लोकोक्ति का प्रयोग उदहारण के तौर पर भी होता है। 

1. अब पछताए होत का, जब चिड़िया चुग गईं खेत ( समय गुजरने पर पछताना व्यर्थ है ) - रमेश फेल होने पर बहुत रोया।  सोचता रहा की यदि थोड़ी-सी मेहनत और कर लेता तो अवश्य पास हो जाता। पर अब पछताए होत का, जब चिड़िया चुग गयी खेत 
2. अक्ल बड़ी या भैस ( काम बुद्धि से होता है, ताकत से नहीं ) - एक पहलवान इस समस्या को हल नहीं क्र सकता, परन्तु उस मरियल ने कैसे आसानी से हल कर दिया। इसीलिए कहते हैं -अक्ल बड़ी या भैस। 
3. अंत भला तो सब भला ( जिस काम का परिणाम अच्छा हो,वही ठीक है ) - यह नौकरी तो छोटी-सी थी,तरक्की  जाने से ठीक ही हो गया। कहा भी है की अंत भला सो सब भला। 
4. अंधों में काना राजा ( मूर्खों में थोड़ा ज्ञानी ) - पुरे गाँव में एक राम ही थोड़ा पढ़ा-लिखा है, बीएस वही अंधों में काना राजा है। 
5. अँधा बाँटे रेवड़ी फिरि-फिरि अपने को देय ( किसी वस्तु को अपने ही सम्बन्धियों को देना ) - देवदत्त के विधायक बनते ही अपने रिश्तेदारों के सब काम करवा दिए और दूसरों की तरफ ध्यान नहीं दिया। ठीक ही कहा है की 'अँधा बाँटे रेवड़ी फिरि-फिरि अपने को देय'
6. अँधा क्या चाहे दो आँखे ( इच्छित वस्तु मिल जाना ) - मुझे धन चाहिए, यदि आप दे देंगे तो मई शोर क्यों मचाऊंगा। आप तो जानते ही है कि अँधा क्या चाहे दो आँखे
7. अंधी पीसे कुत्ता खाये ( मेहनत कोई करे,लाभ किसी और को मिले ) - मोहन की कमाई उसके लड़के जुए-शराब में उड़ा देते हैं। इसे कहते हैं अंधी पीसे कुत्ता खाये
 8. आम के आम, गुठलियों के दाम ( दुगुना लाभ ) - वह अपने मामा के विवाह में मुंबई गया था और वहा से अपने दुकान के लिए सामान भी खरीद लाया। इसे कहते हैं - आम के आम, गुठलियों के दाम
9. आ बैल मुझे मार ( स्वयं विपत्ति में फंसना ) - वह बाजार जा रहा था। रास्ते में दो बदमाशों का झगड़ा छुड़ाने लगा और स्वयं अस्पताल पहुँच गया। इसे कहते है आ बैल मुझे मार
10. आगे कुआँ पीछे खाई ( दोनों ओर संकट ) - कश्मीर में रहने वाले हिन्दू वहाँ से निकलकर कहीं और जाते हैं तो नौकरी नहीं मिलती और वहाँ रहते हैं तो जीवन सुरक्षित नहीं। उनके लिए तो आगे कुआँ पीछे खाई वाली बात हो गयी है।
11. आँख का अंधा नाम नयनसुख (अर्थ के विपरीत नाम ) - उसका नाम तो है खुशी लेकिन वह हमेशा दुखी रहती है। इसे कहते है आँख का अंधा नाम नयनसुख
12. उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे ( स्वयं अपराध करके दुसरो पर दोष मढ़ना ) मेरी किताब गन्दी करके राम मुझे ही डाँटने लगा। यह तो उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे वाली बात हो गयी है।
13. ऊँची दुकान फीका पकवान ( ऊपरी दिखावा ) - मोहन की दुकान में शो-केश तो बड़े सुन्दर लगे हुए हैं मगर अंदर सारा नकली सामान भरा हुआ है।  है न ऊँची दुकान फीका पकवान
14. एक अनार सौ बीमार ( वस्तु एक ग्राहक अनेक ) - एक नौकरी के लिए सैकड़ो फार्म भरे जाते है। यह वही हाल है की एक अनार सौ बीमार
15. एक हाथ से ताली नहीं बजती ( लड़ाई दोनों पक्षों की गलती से होती है ) - पड़ोस में सास-बहु एक दूसरे को ताने दे रही थीं।  मैंने दोनों को चुप कराकर कहा- एक हाथ से ताली नहीं बजती गलती दोनों पक्षों की है।
16. एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है ( एक दुष्ट प्राणी पुरे समाज को गन्दा कर देता है ) - कमल ने कक्षा में आते ही पढाई का वातावरण बिगाड़ दिया है।  ठीक ही कहा है है एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है
17. एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा ( एक तो वैसे ही बुरा हो, फिर उसकी सांगत भी अच्छी न हो ) - नीरज एक तरफ तो स्वभाव से ही बद्तमीज है , दूसरे उसके दोस्त भी वैसे ही मिल गए है सच है एक करेला दूजे नीम चढ़ा
18. एकपथ दो काज ( एक काम से दोहरा लाभ ) - मुझे ऑफिस के काम से दिल्ली जाना है, वैसे भाई साहब से भी मिलता जाऊंगा।  एक पंथ के दो काज हो जाएँगे।
19. करत-करत अभ्यास के, जडमति होत सुजान ( बार-बार परिश्रम करने से मुर्ख भी विद्वान बन जाते हैं ) - कालिदास पहले महामूर्ख थे किन्तु उसकी पढ़ने की लगन ने उन्हें महाकवि बना दिया। उसके लिए करत-करत अभ्यास के, जडमति होत सुजान वाली कहावत चरितार्थ होती है।
20. गरीबी में आटा गीला ( गरीबी में और मुसीबत आना ) - राम ने अपनी कन्या के विवाह के लिए पैसे निकाले थे। उसी समय नोटेबंदी हो गयी इसे कहते है गरीबी में आटा गीला

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